कल्पनाओं को साकार करने वाला वृक्ष : कल्पवृक्ष

दोस्तों कहा जाता है कि देवभूमि के कण कण में 33 करोड़ देवी देवता विराजमान हैं। फिर चाहे वो पत्थर, नदियां, भूमि, हवा, आकाश, पशु, पक्षी या फिर पेड़ ही क्यों ना हो। इस भूमि की अपनी मान्यताएं और अपनी आस्था है जो कि पूरे विश्व में अपनी इसी आस्था कि वजह से अपना अलग स्थान बनाए हुए हैं। दोस्तो आज हम आपको देवभूमि के ऐसे ही एक वृक्ष के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में कहा जाता है कि ये वृक्ष ना केवल मन्नतें ही पूरी…

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कहाँ हैं उत्तराखण्ड का पाँचवा धाम | डोल आश्रम

Dol-Ashram-image

श्री कल्याणिका हिमालया देवस्थानम न्यास कनरा डोल आश्रम उत्तराखण्ड का पांचवा धाम जीं हां दोस्तों आपने सही सुना। उत्तराखण्ड के चारधामों से तो आप परिचित होंगे ही लेकिन क्या आपको पता हैं कि उत्तराखण्ड में एक स्थान ऐसा भी हैं जो निकट भविष्य में पांचवा धाम बनने जा रहा हैं। जी हाॅं दोस्तों उत्तराखण्ड के इस अलौकिक स्थान के बारे में जानने के लिए आप इस विडियो को भी देख सकते हें ताकि आप भी जान सकें कि उत्तराखण्ड का पांचवा धाम कौन सा हैं और इसकी क्या मान्यता हैं।…

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क्या हें गोलू देवता की कहानी | Story of Golu Devta

गोलू देवता

कहा जाता हैं कि गोलू देवता, कत्यूरी राजवंश के राजा झालुराई की इकलौती संतान थे। राजा झालुराई एक न्यायप्रिय, दयालु और तेजस्वी राजा थे। राजा झालुराई की सात पत्नियाॅं थी लेकिन राजा को पुत्र रत्न की प्राप्ति किसी से भी नहीं थी। इस विचार से कि उनका वंश आगे को कौन बढाएगा राजा काफी चिंतित रहता था। इस बात से चिंतित होकर राजा ने भगवान भैरव की घोर तपस्या करी जिससे भगवान ने उनको पुत्र रत्न प्राप्ति का वरदान दिया और कहा कि तुम्हारी आठवीं पत्नि के गर्भ से मैं…

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देवभूमि का ऐसा मंदिर जहां घंटी बजाना मना है

binsar temple

दोस्तों आज हम आपको लव देवभूमि उत्तराखंड के इस पोस्ट में अल्मोड़ा जिले के रानीखेत क्षेत्र में स्थित  बिनसर महादेव मंदिर (सोनी बिनसर) के बारे में जानकारी देने वाले है | दोस्तों ये मंदिर बेहद ही खूबसूरत और प्राकृतिक सौंदर्य की एक मिसाल हैं। इस मंदिर की बनावट मन को मोहने वाली हैं। चलिए जानते हैं इसके बारे में – बिनसर महादेव मंदिर बिनसर महादेव मंदिर अपने पुरातात्विक महत्व और खूबसूरती के लिए लोकप्रिय है। बिनसर महादेव मंदिर एक लोकप्रिय हिंदू मंदिर है । यह मंदिर उत्तराखंड के जिला अल्मोड़ा…

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जागर का महत्व: उत्तराखंड में इनके बुलाने पर देवताओं को आना पड़ता है

जागर का महत्व

देवभूमि में जागर का महत्व उत्तराखंड ‌को ऐसे ही देवभूमि नहीं कहा जाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार समस्त 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास यहीं है। इन सभी देवी-देवताओं का हमारी संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान है। कहा जाता है कि ये देवी-देवता हर कष्ट का निवारण करने के लिये किसी पवित्र शरीर के माध्यम से लोगों के बीच आते हैं और उनका कष्ट हर लेते हैं।  जागर उत्तराखण्ड के गढ़वाल और कुमाऊँ मंडलों में प्रचलित पूजा पद्धतियों में से एक है। पूजा का यह रूप नेपाल के पहाड़ी भागों में…

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जाने क्या है हिन्दू नववर्ष का इतिहास

हिन्दू नववर्ष

देवभूमि उत्तराखंड में हर त्यौहार, सामाजिक कार्य और कोई भी धार्मिक कार्य बड़े उत्साह और मनोरंजन के साथ मनाया जाता है। दोस्तो अंग्रेजी नए साल के बारे में तो आप सब जानते ही होंगे, लेकिन क्या आपको अपने हिन्दू नववर्ष के बारे में पता है, यदि नहीं तो आपको ये लेख अवश्य पड़ना चाहिए। हिन्दू नववर्ष का प्रारंभ शास्त्रों में लिखा है कि जिस दिन सृष्टि का चक्र प्रथम बार विधाता ने प्रवर्तित किया, उस दिन चैत्र शुदी १ रविवार था। हिन्दू नववर्ष अंग्रेजी माह के मार्च – अप्रैल में…

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” भिटौली ” उत्तराखंड की एक विशिष्ट परंपरा

भिटौली

वास्तव में उत्तराखंड एक बेमिसाल राज्य है। यहां मनाए जाने वाले हर त्यौहार के पीछे इसकी कोई ना कोई लोक कथा जरूर होती है या उस त्यौहार का सीधा संबंध प्रकृति से होता है। यहां पर कई अनोखी और विशिष्ट परंपराएं हैं। अनेक अनूठी परंपराओं के लिए पहचाने जाने वाले उत्तराखण्ड राज्य में मायके -ससुराल के प्रेम की एक अनूठी ‘भिटौली’ देने की प्राचीन परंपरा है। पहाड़ में सभी विवाहिता बहनों को जहां हर वर्ष चैत्र मास का इंतजार रहता है, वहीं भाई भी इस माह को याद रखते हैं…

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लंबकेश्वर महादेव जहाँ लंकेश कर बैठा अपनी सबसे बढ़ी भूल

Lambkeswar

जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है कि इस महादेव के स्थान का लंका के राजा लंकेश यानी रावण से कुछ ना कुछ संबंध जरूर होगा। जी हां आप लोग सही सोच रहे हैं। दोस्तो मैंने जब इस जगह या स्थान के बारे में सुना तो मुझे भी बड़ा आश्चर्य हुआ कि महादेव का ऐसा स्थान कहा हैं और इसकी क्या मान्यता हैं और जब मैने इसके बारे में जानकारी जुटाई तो सच में दोस्तों मैं स्तब्ध रह गया और मैंने उसी समय सोच लिया था कि मैं…

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जानिए क्यों मनाया जाता है उत्तराखंड का फूलदेई पर्व

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फूलदेई पर्व उत्तराखंड की धरती पर ऋतुओं के अनुसार कई अनेक पर्व मनाए जाते हैं । यह पर्व हमारी संस्कृति को उजागर करते हैं। वहीं पहाड़ की परंपराओं को भी कायम रखे हुए हैं । इन्हीं खास पर्वो में शामिल “फूलदेई पर्व” उत्तराखंड में एक लोकपर्व है | उत्तराखंड में इस त्योहार की काफी मान्यता है | इस त्योहार को फूल सक्रांति भी कहते हैं। जिसका सीधा संबंध प्रकृति से है । इस समय चारों ओर छाई हरियाली और नए-नए प्रकार के खिले फूल प्रकृति की खूबसूरती में चार-चांद लगा…

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उत्तराखंड का विश्वप्रसिद्ध चमत्कारिक धाम | फेसबुक और एप्पल के मालिक के गुरू का आश्रम

kainchi dham

दोस्तों आज हम आपको एक ऐसे धाम, आश्रम या फिर मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में शायद आप लोगो ने सुना होगा और बहुत से लोगों ने इस धाम के दर्शन भी किए होंगे। इस धाम को किसी परिचय की जरूरत नहीं है। इस धाम के चमत्कार से भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व परिचित हैं। उत्तराखंड को देवो की भूमि देवभूमि कहा जाता है और यहां के धार्मिक महत्व के बारे में पूरा विश्व जानता हैं। तो चलिए ऐसे ही एक विश्व प्रसिद्ध धाम…

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जानिए कहाँ मनायी जाती है उत्तराखंड की विश्वविख्यात होली

उत्तराखंड की होली

होली का त्यौहार हिन्दू धर्म से संबंधित है। हिंदुस्तान में इस त्यौहार को केवल हिंदू लोग ही मनाते हैं, लेकिन उत्तराखंड में इस त्यौहार को सभी धर्मों के लोग बड़े उत्साह से मनाते हैं। उत्तराखंड में होली का त्यौहार सबसे ज्यादा लोकप्रिय त्यौहार माना जाता है। उत्तराखंड की सबसे ज्यादा प्रसिद्ध होली अल्मोड़ा जिले की मानी जाती है। उत्तराखंड की होली देखने और मनाने के लिए काफी संख्या में विदेशी पर्यटक भी यहां आते हैं और होली के रंग में रंग जाते हैं। चलिए दोस्तो आज हम आपको उत्तराखंड की…

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उत्तराखंड में पायी जाने वाली जड़ी बूटियाँ जिनकी कीमत प्रति किलो 8-10 लाख रुपए है

जाने देवभूमि उत्तराखंड के 5 औषधीय जड़ी बुटियों के बारे में देवभूमि उत्तराखंड में बेहद खूबसूरत प्रकृति के नजारे देखने को मिलते हैं यहाँ कई सारे छोटे और बड़े बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है । लेकिन यहाँ प्राकृतिक के नजारों के साथ कई तरह के जड़ी बूटियाँ भी पाई जाती हैं जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है । इस वजह से कुछ जड़ी बूटियों की कीमत तो 8 से 10 लाख रुपये प्रति किलो तक भी होती है । आज हम जानेंगे कुछ ऐसे ही जड़ी बूटियों के…

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उत्तराखंड का एकमात्र ऐसा मंदिर जहां सूर्य निकलते ही सूर्य की पहली किरण इस मंदिर में पड़ती है।

कटारमल सूर्य मंदिर

आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो की पूरे भारत में केवल दो ही जगह स्थित है। जिसमें से एक हैं उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में। यह मंदिर उत्तराखंड में स्थित अल्मोड़ा जिले के अधेली सुनार गांव में भगवान सूर्य देव को समर्पित विश्व विख्यात  कटारमल मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। यह अल्मोड़ा से 17 किलोमीटर की दूरी पर 3 किलोमीटर पैदल कच्चे रास्ते पर चलने के बाद पश्चिम की ओर स्थित है। यह मंदिर एक सुंदर पहाड़ी पर्वत पर समुद्र तल…

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जानते है देव भूमि उत्तराखंड के 10 सबसे ठंढी खूबसूरत जगह के बारे में

उत्तराखंड में ऐसे कई सारी जगह है जहाँ से गर्मी का एहसास तक नहीं होता है गर्मी के मौसम में भी ठंड लगती है । देवभूमि उत्तराखंड में हरे भरे जंगल उफनती नदियों की धाराएँ और वहाँ का सुखद मौसम हर किसी को अपनी तरफ़ आकर्षित करता है । आज हम जानेंगे उत्तराखंड के कुछ ऐसी जगहों के बारे में जहाँ गर्मियों में भी तापमान बेहद कम होता है और ठंड के मौसम में तो वहाँ बर्फ़ पड़ी रहती है । आइये जानते हैं उत्तराखंड के सबसे ठंडी जगहों के…

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उत्तराखण्ड की ऐसी जगह जहां शिव ने बाघ का रूप धारण किया

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उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर जो बागनाथ के नाम से प्रसिद्ध है। यह मंदिर सिर्फ बागेश्वर जिले में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। बागेश्वर जिले का नाम भी इसी मंदिर के आधार पर रखा गया है। यह मंदिर समुद्र तल से 1004 मीटर की ऊंचाई पर सरयू तथा गोमती नदी के संगम पर स्थित है। इसके पूर्व में भिलेश्वर पर्वत, पश्चिम में नीलेश्वर पर्वत, उत्तर में सूर्यकुण्ड तथा दक्षिण में अग्निकुंड स्थित है। इस मंदिर का निर्माण कुमाऊं के राजा…

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जाने रहस्यमय शिव मंदिर के बारे में जहाँ विज्ञान भी फेल हैं

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आज हम आपको एक ऐसे शिव मंदिर के बारे में बता रहे हैं जिसके बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर में विज्ञान भी फेल हो जाता है। तो चलिए जानते हैं कि ऐसा शिव मंदिर कहा हैं और इसकी मान्यता क्या है – ये शिव मंदिर उत्तराखंड के जिला पिथौरागढ़ जिसे सोर घाटी और मिनी कश्मीर के नाम से भी जाना जाता है, से लगभग ६-७ कि ० मी ० दूर चंडाक में स्थित मोस्टामानू मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हैं। मोस्टामानू देवता को इस क्षेत्र के आराध्य…

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क्या आप जानते हैं  उत्तराखंड का एकमात्र घाट जहाँ सूर्यास्त के बाद भी जलती हैं चिताएं ?

अल्मोड़ा के इतिहास के बारे में जाने तो अल्मोड़ा कुमाऊँ हिमालय श्रृंखला की एक पहाड़ी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है। अल्मोड़ा की स्थापना राजा बालो कल्याण चंद ने 1568 में की थी। अल्मोड़ा, कुमाऊं  पर शासन करने वाले चंदवंशीय राजाओं की राजधानी थी। अल्मोड़ा को धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक आस्था की दृष्टि से यहां कई ऐसे मंदिर हैं जिनकी ख्याति देश विदेशो में भी हैं। वैसे तो अल्मोड़ा के बारे में कई रोचक जानकारियां मौजूद है लेकिन आज जो हम आप…

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चितई गोलू देवता मन्दिर : न्याय का मंदिर

Chitai Golu Temple

चितई गोलू देवता मन्दिर देवभूमि उत्तराखंड धार्मिक स्थलों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है इन धार्मिक स्थलों की लोकप्रियता विदेशो तक मशहूर है । आज हम आपको एक ऐसे ही धार्मिक स्थल के बारे में बताने जा रहे हैं जिसको न्याय का देवता भी कहा जाता है। यह धार्मिक स्थल अल्मोड़ा जिले में स्थित चितई गोलू देवता का मंदिर है। इस मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ , लगातार गुंजती घंटों की आवाज और यहां पर लगी अनगिनत चिठियों से ही गोलू देवता की लोक प्रियता का अंदाजा…

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प्राचीन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल का केंद्र अल्मोड़ा (Almora)

Almora_Uttarakhand_India अल्मोड़ा

अल्मोड़ा उत्तराखंड का एक जिला है । यह कुमाऊं मंडल के अंतर्गत आता है । अल्मोड़ा की समुद्र तल से ऊंचाई 1646 मीटर है । अल्मोड़ा एक पहाड़ी नगर है जो दोनों तरफ से पहाड़ों की चोटियों पर बसा है । अल्मोड़ा नगर के नीचे कोसी और सुयाल नदियां बहती हैं । अल्मोड़ा कुमाऊँ हिमालय के लगभग घोड़े की काठी के आकार में हिमालय के दक्षिणी किनारे पर है । यह जिस पहाड़ी चोटी पर स्थित है उसके पूर्वी भाग को तेलीफट और पश्चिमी भाग को सेलिफट के नाम से…

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जाने देवभूमि उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र के प्रसिद्ध पकवान

famous recipes of Uttarakhand

देवभूमि उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र के प्रसिद्ध पकवान जो स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी होते हैं…. देवभूमि उत्तराखंड के सुंदर प्राकृतिक नजारे मन को शांति देते हैं । यहां पर एक सुकून सा मिलता है । शहरों की भीड़ भाड़ से दूर उत्तराखंड के विभिन्न हिल स्टेशन पर लोग छुट्टियां बिताने के लिए आते हैं । यहां का प्राकृतिक मनमोहक वातावरण मन को सुकून देता है। उत्तराखंड की वादियों में घूमने का एक अलग ही मजा होता है । उत्तराखंड के छोटे छोटे हिल स्टेशनों और प्राकृतिक…

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