बिना मिट्टी की खेती, सालाना लाखों में हो सकती है कमाई | Hydroponics Farming

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जाने किस तरह हाइड्रोपोनिक्स (hydroponics) विधी द्वारा बिना मिट्टी के पौधे उगाने की तकनीक

अपने निजी जिंदगी में आपने कभी ना कभी तो यह देखा ही होगा कि जब आप पानी से भरे गिलास या किसी गमले में पौधे की टहनी को छोड़ देते हैं तो कुछ दिनों के बाद उसमें जड़ निकलने लगते हैं और वह पौधा धीरे-धीरे बड़ा होने लगता हैं।हालांकि, हम यह जानते है कि ज्यादातर पेड़-पौधे जमीन पर ही उगाए जाते हैं।

जमीन पर उगने वाले पैड़-पौधे को खाद,मिट्टी, पानी और सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती हैं। लेकिन आज के इस तकनीक के दौर में फसल उगाने के लिये केवल तीन चीजों की आवश्यकता होती हैं:- जो हैं पानी, पोषक तत्व और सूर्य के प्रकाश। इस तरीके से अगर हम पेड़-पौधों को बगेर मिट्टी के उपयोग किए बिना ही पोषक तत्व,पानी और सूरज के प्रकाश की उपस्थिति में उपलब्ध करा दें तो भी फसल उगाए जा सकते हैं।

बढ़ती आबादी के बीच जब फसल उगाने के लिए जमीन की कमी हो जाती है तब यह तकनीक काम में लाई जाती है जो काफी उपयोगी साबित होती है। इस तकनीक का इस्तेमाल करके आप अपने घर में बिना मिट्टी के ही पौधे, सब्जियां और फसल को आसानी से उगा सकते हैं।मिट्टी के बिना ही फसल उगाने के इस बेहतरीन और लाभदायक तकनीक को हम हाइड्रोपोनिक्स के नाम से जानते हैं।

तो चलिए जानते हैं हाइड्रोपोनिक तकनीक के बारे में:-

क्या है हाइड्रोपोनिक तकनीक (what is hydroponics) ?

मिट्टी का उपयोग किए बिना बेहतरीन फसल, सब्जियां और अन्य प्रकार के खाद्य पदार्थ को उगाने की प्रक्रिया को हम हाइड्रोपोनिक तकनीक कहते हैं। इस तकनीक में केवल बालू या कंकरों से ही नियंत्रित जलवायु के बीच अच्छी फसल को उगाया जा सकता हैं। हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पौधों को उतकृष्ट परिस्थितियों में 16 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लगभग 75 से 80 प्रतिशत आर्द्रता में उगाया जाता है।

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सामान्य पेड़-पौधे अपने आवश्यकतानुसार पोषक तत्व जमीन से लेते हैं, परंतु इस बेहतरीन हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पौधे के पोषक तत्व की आवश्यकता की पूर्ति एक विशेष प्रकार के गोल को डालने के बाद किया जाता है। इस घोल को डालने के बाद पौधे में उतकृष्ट मात्रा में आवश्यक खनिज एवं पोषक तत्व मिला दिए जाते हैं। बिना मिट्टी के उगाए गए पौधों में इस घोल को महीने में केवल दो-एक बार ही दिया जाता है। वह भी इस गोल की कुछ बूंदे ही डाली जाती है।विशेष प्रकार के इस घोल में खास मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सल्फर, जिंक और आयरन आदि तत्वों को मिलाया जाता हैं।

विश्व के किन-किन जगहों में हो रहे इस तकनीक का ज्यादातर उपयोग?

इस बेहतरीन तकनीक का उपयोग खासकर पश्चिमी देशों में भारी मात्रा में फसल उत्पादन के लिये इस्तेमाल किया जा रहा है।भारत में भी इस तकनीक का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा रहा है। भारत का जाना-माना राज्य राजस्थान जहां पर विपरीत जलवायु वाली परिस्थितियां होने के कारण मिट्टी में फसल नहीं उगाए जा सकते हैं वहां पर इस तकनीक का उपयोग ऊंचे स्तर पर किया जाता है। यह लाभदायक तकनीक राजस्थान के किसानों के लिए वरदान साबित होती है। इस तकनीक का खासकर उपयोग वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर में मक्का, जौ आदि फसलों में किया जाता है।इस हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का उपयोग करके बारहों महीने पशुओं के लिये पौष्टिक हरा चारा उत्पन्न किया जाता है। गोवा जैसे छोटे राज्य में जहां भूमि का अभाव होने के कारण पशुओं को चारा नहीं मिल पाता हैं। उस राज्य में चारागाह के लिए उत्पन्न स्थिति को देखकर भारत सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च के गोवा परिसर में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से पशुओं के लिए पौष्टिक चारा उत्पादन करने वाली इकाई की स्थापना की गई है। ऐसी ही दस और इकाइयाँ राज्य में लगाई गई है जिससे प्रत्येक दिन 600 ग्राम चारा उत्पन्न करने की क्षमता है।

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सबसे पहले जानते हैं हाइड्रोपोनिक्स के क्या-क्या लाभ होते है?

हाइड्रोपोनिक्स के लाभ कुछ इस तरह से है:-

1. हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के द्वारा पौधे और फसल दोनों को कम खर्च में उगाया जा सकता है। अगर हम 6 से 7 इंच वाले पौधे लगाते हैं तो इसके लिए हमें कम से कम ₹2 खर्च करना पड़ता है लेकिन इस पौधे में अगर हम 2रुपया लगाते हैं तो इससे हमें ₹10 आमदनी भी होता है।

2. हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पौधों को अगर हम उगाते हैं तो ये पौधा कम खर्च में हो जाता है इसके लिए आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति करने के लिए हमें आवश्यक खनिजों के घोल की कुछ बूँदें की जरूरत पड़ती है। जिसे हम एक दो बार उस पौधे में डालेगे इसकी सहायता से हम कही भी पौधे उगा सकते हैं। इसमें कोई परेशानी नहीं होती।

3. अगर हम चाहे तो हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का इस्तेमाल हम बड़े-बड़े स्तर पर कर सकते हैं। हाइड्रोपोनिक्सकई तकनीकी का इस्तेमाल करके यहां बड़े पैमाने पर साक-सब्जियां बड़ी-बड़ी इमारतों पर भी उगा सकते है।

4. इस विधि से अगर हम पौधा उगाते हैं तो इसमें पौधा मिट्टी और जमीन से कोई वास्ता नहीं रखता है जिससे कि इसमें कीटनाशक दवाइयों का भी इस्तेमाल बहुत कम करना पड़ता है और अगर हम यह फल और सब्जियां खाते हैं तो इससे हम बीमारियां भी बहुत कम होते है।

5. चूँकि हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पौधों में पोषक तत्वों का विशेष घोल डाला जाता है, इसलिये इसमें उर्वरकों एवं अन्य रासायनिक पदार्थों की आवश्यकता नहीं होती है। जिसका फायदा न केवल हमारे पर्यावरण को होगा, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य के लिये भी अच्छा होगा।

6. जैसा कि हम सभी जानते हैं अगर किसी फल और सब्जियां में हम ज्यादा कीटनाशक दवाइयों का उपयोग करते हैं तो वो हमारे शरीर के लिए हानिकारक होता है लेकिन अगर हम हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से अगर हम सब्ज़ियाँ और पौधे उगाते हैं तो वो अधिक पौष्टिक होते हैं। क्योंकि उसमें कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव बहुत कम किया जाता है।

7. हाइड्रोपोनिक्स विधि से हम घर के सिवा अपने खेतों में भी पौधा उगा सकते हैं अगर हम इस विधि से पौधे उगाते हैं तो हमारा पौधा कम समय में तैयार हो जाता है।

8. हाइड्रोपोनिक्स जो पौधे उगाए जाते हैं वह बहुत कम स्थान लेता हैं लेकिन अगर हम जमीन में खेती करते हैं और उसमें जो पौधा निकालता है वह ज्यादा जमीन लेता है।

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का बेहतरीन उपयोग करने से गेहूँ जैसे अनाज के पौधे 6 से 8 दिन में पककर तैयार हो जाते है,जिस पौधे को सामान्य रुप से पककर तैयार होने में 30 से 32 दिनों का समय लगता है।

अब हम जानेंगे हाइड्रोपोनिक्स तकनीक की चुनौतियाँ के बारे में

अब आप यह सोचेंगे के हाइड्रोपोनिक्स तकनीक इतने लाभदायक प्रक्रिया हैं तो यह तकनीक ऊचे स्तर पर फैल क्यों नहीं रहा है? यह इसलिए क्योंकि इस कमाल के तकनीक में कई कठोर परेशानीयाँ,कठिनाइयाँ और चुनौतियाँ भी हैं।

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तो चलिए जानते हैं ऐसे ही कई चुनौतियों और कठिनाइयों के बारे में जो इस लाभदायक तकनीक के रास्ते में आते है:-

1. सबसे जटिल समस्या इस तकनीक के शुरुआती दौर में आती है जो है खर्चे।इस तकनीक को लगाने में बहुत ही ज्यादा खर्च आता है।लेकिन जहां एक तरफ इसे लगाने में बहुत ज्यादा पैसे की जरूरत होती है उसी दूसरी तरफ इस तकनीक के लगने के बाद काफी ज्यादा मुनाफा होता है।

2. इस बेहतरीन तकनीक में सबसे पहली जरूरत पानी के पंपों की होती है जो इस तकनीक के शुरुआत में इस्तेमाल होता है। पानी के पंपों को लगातार चलाने के लिए विद्युत आपूर्ति की जरूरत होती है। इससे साफ होता है कि विद्युत आपूर्ति को लगातार बनाए रखना ही इस तकनीक की दूसरी सबसे बड़ी चुनौती होती है।

3. लोगों को ऐसा लगता है कि हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए काफी जानकारी होने की जरूरत होती है। साथ ही उन्हें यह भी लगता है कि इस तकनीक के लिए शोध अध्ययन की आवश्यकता होती हैं। इन कारणों से वह इस तकनीक को इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं।लेकिन असल में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। लोगों के इस मनोवृति को बदलना ही इस तकनीक का तीसरा सबसे बड़ा चुनौती है।

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