कहाँ हैं उत्तराखण्ड का पाँचवा धाम | डोल आश्रम | Dol Ashram

श्री कल्याणिका हिमालया देवस्थानम न्यास कनरा डोल आश्रम

उत्तराखण्ड का पांचवा धाम जीं हां दोस्तों आपने सही सुना। उत्तराखण्ड के चारधामों से तो आप परिचित होंगे ही लेकिन क्या आपको पता हैं कि उत्तराखण्ड में एक स्थान ऐसा भी हैं जो निकट भविष्य में पांचवा धाम बनने जा रहा हैं। जी हाॅं दोस्तों उत्तराखण्ड के इस अलौकिक स्थान के बारे में जानने के लिए आप इस विडियो को भी देख सकते हें ताकि आप भी जान सकें कि उत्तराखण्ड का पांचवा धाम कौन सा हैं और इसकी क्या मान्यता हैं।

यह आश्रम सांस्कृतिक और धार्मिक नगरी अल्मोंड़ा से 40 कि0मी की दूरी पर लमगड़ा ब्लाॅक के कनरा डोल गाॅंव में श्री कल्याणिका हिमालया देवस्थानम न्यास कनरा डोल नाम से विश्व विख्यात हैं। इसका निर्माण श्री परम योगी कल्याणदास जी ने किया हैं। इसकी स्थापना के बारे में कहा जाता हैं एक बार श्री कल्याण दास जी अपनी कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान इस स्थान से गुजर रहें थे तो यहां कि अलौकिक छठा, शांति और सुंदरता को देखकर वो काफी प्रभावित हुए और उन्होने उसी समय निर्णय ले लिया था कि वो यहां एक आश्रम बनाएंगे।

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श्री परम योगी कल्याणदास जी

पहाड़ों की खुबसूरत वादियों और हरे भरे जंगलों के बीच में बसे कुल 8 एकड़ में स्थित इस आश्रम की खुबसूरती इतनी मनमोहक हैं कि विदेशों के श्रद्वालु भी यहाँ आकर आनन्दित हो जाते हैं। कहा जाता हैं कि इसकी स्थापना लगभग 1994 के आसपास हुयी हैं। इस आश्रम की स्थापना के पीछे मुख्य उद्देश्य यह था कि लोगों को साधना का केन्द्र मिल सकें जिससे वह अपनी अंतरात्मा को जागृत कर सकें।

डोल आश्रम
डोल आश्रम

इस आश्रम की सबसे खास बात यह हैं कि यहां पर 126 फीट उंचे पीठ का निर्माण कराया गया हैं जिसमें दुनिया के सबसे बड़ें और सबसे भारी अष्टधातु से निर्मित कुल 1 टन भार वाले और साढ़े तीन फुट उंचे श्रीयंत्र की स्थापना की गयी हें । इस श्रीयंत्र की स्थापना समारोह के कार्यक्रम में शामिल अतिथियों में राज्य के राज्यपाल ने इसे उत्तराखण्ड के पांचवे धाम की संज्ञा दी। इसी वजह से इसे देवभूमि के पांचवे धाम के रूप में भी जाना जाता हैं।

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श्रीयंत्र

ये श्रीयंत्र विश्व का सबसे बड़ा और सबसे भारी श्रीयंत्र हैं। कहा जाता हैं कि वैदिक और आध्यात्मिक आस्था को एक साथ जोड़ने के लिए इस श्रीयंत्र की स्थापना की गयी हैं। इस पीठ की विशालता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता हैं कि इसमें एक साथ लगभग 500 लोग एक साथ बैठकर ध्यान लगा सकते हैं। इस आश्रम में वास्तुकला को ध्यान में रखते हुए नवग्रहों की भी स्थापना की गयी हैं।

दोस्तों हिन्दू धर्म में श्रीयंत्र का अपना खास महत्व हैं। कहा जाता हैं कि श्रीयंत्र एक प्रकार की ज्यामितीय आकृति हैं जो मंत्रों और शक्तियों का एक भौतिक स्वरूप हैं। किसी विशेष शक्ति या मंत्र को अगर किसी रूप में एक साथ ढाला जाए तो श्रीयंत्र का निर्माण होता हैं। श्रीयंत्र में आकृति, बिंदुओं और रेखाओं का इस्तेमाल किया जाता हैं। एक भी चीज इनमें से गलत होने पर पूरे श्रीयंत्र का महत्व बेकार हो जाता हैं।

श्रीयंत्र की अगर पौराणिक कथाओं की बात की जाए तो कहा जाता हैं कि यह यंत्र धन की देवी श्री लक्ष्मी जी का यंत्र होता हैं। शास्त्रों में कहा गया हैं कि जहां श्रीयंत्र की स्थापना होती हैं वहां श्री का वास होता हैं और चाहकर भी देवी लक्ष्मी उस स्थान को छोड़कर नहीं जाती हैं। इसके पीछे भी एक पौराणिक कथा हैं कहा जाता हैं कि एक बार माॅं लक्ष्मी रूठ कर बैंकुठ धाम चली गयी थी और उनके जाते ही धरती और देवलोक में त्राहि त्राहि मच गयी तब देवगुरू बृहस्पति ने उन्हें मनाने के लिए और वापस बुलाने के लिए श्रीयंत्र की स्थापना और पूजा का मार्ग बताया जिसके उपरान्त मां लक्ष्मी पुनः धरती पर लौट आयी। कहा जाता हैं कि तभी से श्रीयंत्र के पूजन का विधान हैं।

डोल आश्रम school
वेद वेदांत संस्कृत विद्यापीठ

इस आश्रम के द्वारा जनकल्याणकारी कार्यो में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी जा रहीं हैं। इस आश्रम के द्वारा विद्यार्थीयों को संस्कृत भाषा का सम्पूर्ण ज्ञान दिया जा रहा हैं, जिसके लिए इस आश्रम में वेद वेदांत संस्कृत विद्यापीठ का निर्माण किया गया हैं जिसमें कक्षा 01 से लेकर कक्षा 12 तक के छात्रों को संस्कृत भाषा का ज्ञान दिया जाता हैं। इस विद्यापीठ को निकट भविष्य में पब्लिक स्कूल के रूप में विकसित कीया जा रहा हैं। इस विद्यापीठ में काफी छात्रों को निःशुल्क सेवा भी प्रदान की जा रही हैं। इस विद्यापीठ के द्वारा छात्रों को हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति और सभ्यता से रूबरू कराया जाता हैं। इसके साथ ही छात्रों को अंग्रेजी तथा कम्प्यूटर भाषा का ज्ञान भी दिया जा रहा हैं ताकि यहां के छात्र निकट भविष्य में किसी भी क्षेत्र में पीछे ना रहें। इसके लिए यहां पर एक विशाल लाइब्रेरी की स्थापना भी की गयी हैं।

यह आश्रम जहां एक ओर हमारे ऋषि-मुनियों की संस्कृति को संजोने का काम कर रहा हैं वहीं दूसरी तरफ वर्तमान समय की आधुनिक तकनीक का ज्ञान भी दे रहा हैं। इस आश्रम में अनेक तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं जैसे श्रद्वालुओं के रहने की सुविधा, मेडिटेशन हाल, चिकित्सा सेवा, एंबुलेंस सेवा, लाइब्रेरी तथा विद्यालय।

दोस्तों आशा करता हूॅं कि आपको ये पोस्ट  जरूर पसंद आया होगा

जय उत्तराखंड

 

Piyush Kothyari

Hi there, I'm Piyush, a proud Uttarakhand-born author who is deeply passionate about preserving and promoting the culture and heritage of my homeland. I am Founder of Lovedevbhoomi, Creative Writer and Technocrat Blogger.

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