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आइये जानते है उत्तराखंड की एक दिन की CM रही सृष्टि गोस्वामी के बारे में

सृष्टि गोस्वामी(Sristi Goswami) को राष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का पद मिला था। जिसमें सृष्टि ने सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा की। भले ही सृष्टि को एक दिन के लिए प्रतीकात्मक तौर से मुख्यमंत्री का पद मिला । लेकिन वह उत्तराखंड की पहली लड़की मुख्यमंत्री बन गई हैं। 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राष्ट्रीय बालिका दिवस (National girls child day) के दिन बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सृष्टि गोस्वामी को एक दिन का प्रतीकात्मक सीएम बनने का अवसर दिया। इस मौके पर उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत और बाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ने विधानसभा में सृष्टि गोस्वामी(Sristi Goswami) का स्वागत किया। बता देंगे राष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है।

सृष्टि गोस्वामी(Sristi Goswami) कौन है ?


सृष्टि गोस्वामी(Sristi Goswami) उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के बहादराबाद विकासखंड के दौलतपुर गांव की रहने वाली है। इस समय वह रुड़की केबीएमसी पीजी कॉलेज से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर रही है। उनके पिता प्रवीण दौलतपुर गांव में एक छोटी किराने की दुकान चलाते हैं और उनकी मां सुधा गोस्वामी एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में काम करती हैं। सृष्टि का एक छोटा भाई है श्रेष्ठ गोस्वामी जो कक्षा 11 का छात्र है। बता देंगे इसके पहले साल 2018 में सृष्टि गोस्वामी उत्तराखंड विधानसभा में बाल विधायक के रुप में चुनी गई थी। तब उन्हें उत्तराखंड बाल विधानसभा का मुख्यमंत्री बनाया गया था। इसके अलावा 2019 में वह भारत की प्रतिनिधि के रूप में गर्ल्स इंटरनेशनल लीडरशिप के लिए थाईलैंड गई थी। 

विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुतीकरण –


इस कार्यक्रम के दौरान सृष्टि गोस्वामी के समक्ष बाल विकास विभाग ने महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराध और उनके उन्मूलन की दिशा में उठाए जा रहे सरकार के प्रयासों की जानकारी दी साथ ही पुलिस विभाग में बाल अपराध, साइबर अपराध, नशा मुक्ति अभियान “ऑपरेशन सत्या”, बाल तस्करी मुक्ति हेतु ऑपरेशन स्माइल” का उदाहरण देते हुए सरकार के प्रयासों के बारे में जानकारी दी। इसके अतिरिक्त उद्योग, स्मार्ट सिटी शिक्षा जैसे अन्य विभागों ने भी सृष्टि के समक्ष अपने प्रस्तुतीकरण दिये।

मुख्यमंत्री के रूप में सृष्टि के कामकाज और सुझाव –


एक दिन के लिए प्रतीकात्मक मुख्यमंत्री बनी सृष्टि ने राज्य के अलग-अलग विभागों की समीक्षा की। उन्होंने विभिन्न विभागों के साथ बैठक कर के उनका प्रस्तुतीकरण देखा। बैठक के दौरान सृष्टि ने बालिकाओं को सुरक्षा दिए जाने, कालेजों के आसपास मादक पदार्थ की बिक्री को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने, बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने, बाल अपराधों पर लगाम लगाने, सहज और सरल शैक्षणिक वातावरण बनाने जैसे सुझाव दिए हैं। कार्यक्रम के बाद जब “नायक” फ़िल्म से उनकी तुलना की गई तो सृष्टि ने कहा कि वह फिल्म(reel life) थी लेकिन असल जीवन(real life) में बाल मुख्यमंत्री(chief minister) बनकर वह बेहद उत्साहित है।

बाल विधायक सदन


प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और मुख्य सचिव ओमप्रकाश तथा महिला आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी के समन्वित प्रयास से सृष्टि को एक दिन के लिए मुख्यमंत्री का पद दिया गया। इस कार्यक्रम में सृष्टि की अध्यक्षता में उत्तराखंड के विधानसभा में बाल विधायक सदन का आयोजन किया गया था। जिसमें नेता प्रतिपक्ष आसिफ हसन ने सदन में सरकार के समक्ष प्रश्न उठाया। बाल मुख्यमंत्री सृष्टि और उनके बाल मंत्रियों ने नेता प्रतिपक्ष द्वारा उठाए गए सभी प्रश्नों का क्रमवार से उत्तर दिया।

महिला सशक्तिकरण के दिशा में प्रयास –


सृष्टि को एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनाए जाने के कार्यक्रम को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बालिकाओं का सम्मान बताया है और कहा कि इस तरह के आयोजन से बालिकाओं को अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि ये बालक कल के कर्णधार बनेगे, जो देश को एक बेहतर दिशा में ले जाएंगे। इसलिए यह जरूरी है कि इन्हें समसामयिक विषयों के साथ विधायिका के स्तर पर होने वाले कार्यों की पूरी जानकारी रहे।

सृष्टि (Sristi Goswami) को मुख्यमंत्री बनाने का उद्देश्य –


sristi goswami one day CM

उत्तराखंड के बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने बताया कि सृष्टि को एक दिन का प्रतीकात्मक मुख्यमंत्री बनाने का उद्देश्य लड़कियों के सशक्तिकरण को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाना है। इस मौके पर उत्तराखंड बाल संरक्षण बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम के माध्यम से बालिकाओं और बच्चों को बाल सदन में अवसर देने से उन्हें जीवन में आगे बढ़ने और कुछ करने के लिए प्रेरणा मिलेगी। विभिन्न विभागों की समीक्षा और प्रस्तुतीकरण के दौरान सृष्टि ने अपने जो महत्वपूर्ण सुझाव दिये उनको लागू करने का आश्वासन दिया गया है। सृष्टि द्वारा दियर गए सुझावों को बाल सदन राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को सौपेगा फिर आयोग यह सुझाव मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को सौंप देगा।

सृष्टि (Sristi Goswami) के माता पिता की प्रतिक्रिया –


एक दिन के मुख्यमंत्री बनने वाली सृष्टि के माता-पिता खुद को बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे थे। सृष्टि के पिता ने कहा कि वह बेहद खुश हैं और उन्हें अपनी बेटी पर बहुत गर्व हो रहा है। सृष्टि की मां ने कहा कि उनकी बेटी ने जो मुकाम हासिल किया है उससे देश के हर माता-पिता को एक संदेश जाएगा कि बेटियों को आगे बढ़ने से रोकना नही चाहिए। बेटा और बेटी को समान प्यार, इज्जत और मौका देना चाहिए क्योकि बेटों की तरह बेटियां भी अपने मेहनत के दम पर हर मुकाम हासिल कर सकती है। 

लोगो की प्रतिक्रिया –


महिला सशक्तिकरण और अधिकारों के लिए काम करने वाले उत्तराखंड के संगठनों और एक्टिविस्टो ने सृष्टि को एक दिन का मुख्यमंत्री बनाये जाने के सरकार के कदम की सराहना की है। लेकिन उन्होंने कुछ सवाल भी खड़े किए हैं।

कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएवी कैंपस की छात्रसंघ की पहली महिला महासचिव भारतीय जोशी कहती हैं “प्रतीकात्मक तौर पर तो महिला के सशक्तिकरण के लिये ऐसे प्रयास करना अपनी जगह है लेकिन वास्तविक में महिलाओं का सशक्तिकरण सबसे बड़ी चुनौती है। 20 साल बीत जाने के बाद भी अभी तक किसी महिला के नाम को मुख्यमंत्री पद के रूप में आज तक जिक्र भी नही किया गया। लेकिन असल में उत्तराखंड के पहाड़ों का असली भार महिलाओं पर ही है। लेकिन आज भी महिला सशक्तिकरण एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि आरक्षण की वजह से ग्राम पंचायतों से लेकर विधान सभाओं में कुछ महिलाएं राजनीति में देखने को मिली। लेकिन यह सिर्फ एक मुखड़ा है । व्यवहारिक रूप से असली ताकत उन महिलाओं के पीछे उनके पति या पिता के हाथ मे रहती है। इसलिए महिलाओं को प्रतीकात्मक सशक्त बनाने के बजाय वास्तविक रूप में सशक्त बनाया जाए।”

वहीं उत्तराखंड में महिला के स्वास्थ्य और अधिकारों पर काम करने वाली एक गैर सरकारी संगठन की वरिष्ठ सदस्य मालती हालदार ने कहा “प्रतीकात्मक सशक्तिकरण का दिखावा करने की बजाय बहुत बुनियादी स्तर पर काम करने की जरूरत है। किसी परिवार में बेटे और बेटी को मिलने वाले दूध के गिलास के साइज का फर्क असली सवाल है। बेटे को अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने और बेटियों को खस्ताहाल सरकारी स्कूल में पढ़ाने की आदत का सवाल है। उन्होंने कहा कि बेहद जमीनी स्तर पर काम किये बगैर महिलाओं का सशक्तिकरण संभव ही नही है। जरूरत है लोगों की मानसिकता में बदलाव लाने की और बेटियों को अवसर देने की।

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