उत्तराखंड के जंगलों में इस वजह से लग रही आग

Fire in Uttarakhand Forest

उत्तराखंड के जंगलों में आग: इन दिनों उत्तराखंड के जंगल में लगी आग ( Fire in Uttarakhand Forest) चर्चा का विषय है। उत्तराखंड वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक साल से भी कम समय मे उत्तराखंड के जंगलों में 45 जगह पर आग लगी है। जिससे 68.7 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है। बता दें कि 1 अक्टूबर 2020 से अब तक उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने के 667 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इस आग की वजह से अब तक करीब 1359 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुए हैं। बता दें कि उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने का प्रमुख कारण इंसानी दखल को माना जाता है। हर साल इंसानी दखल के चलते सैकड़ों हेक्टेयर जंगल आग की वजह से खाक हो जाते हैं जिसकी वजह से जैव विविधता, पर्यावरण और वन्य जीव प्रभावित होते हैं।

उत्तराखंड के जंगलों में क्यो लगती है आग – 

उत्तराखंड के वन विभाग के फॉरेस्ट फायर ऑफिसर मान सिंह कहते हैं कि जंगल में आग लगने की 98 फीसदी घटनाएं मानव जनित कारणों की वजह से होती है। कहा जाता है कि अक्सर ग्रामीण जंगल में गिरी पत्तियों और सूखी घास में आग लगा देते हैं। वह ऐसा इसलिए करते है जिससे वहां पर नई घास उग आए। लेकिन आग बढ़ जाने पर यह बेकाबू हो जाती है। 

यही घटना हर साल घटित हो रही है। पिछले साल कोरोना वायरस की वजह से देशव्यापी लॉक डाउन किया गया था। जिसकी वजह से जंगलों में इंसानी गतिविधियां कम हुई। लेकिन इस बार फिर से जंगलों में आग लगने की घटना बढ़ गई है।

 बता दें कि चीड़ के जंगलों में आग की घटनाएं अधिक होती है। क्योंकि चीड़ की पत्तियां और उसके छाल से निकलने वाला रसायन बेहद ही ज्वलनशील होता है। उसमें थोड़ी सी आग लगने पर वह तेजी से फैल जाता है। ज्यादातर गलती और कभी-कभी जानबूझकर की गई इंसानी गलतियों की वजह से ही उत्तराखंड के जंगलों में आग लग रही है और देखते ही देखते यह आग बेहद तेज भड़क जाती है। उत्तराखंड के जंगलों में चीड़ के जंगलों का प्रतिशत 16 से 17% है। ऐसे में आग लगने का प्रमुख कारण इंसानी दखल ही है।

वन विभाग का जंगलों की आग को रोकने के प्रयास –

  उत्तराखंड में आमतौर पर 15 फरवरी से 15 जून तक के समय को फायर सीजन के नाम से जानते हैं। हर साल उत्तराखंड का वन विभाग जंगलों की आग को फैलने से रोकने के लिए अपने स्तर से कई तरह की तैयारियां करता है। फॉरेस्ट फायर ऑफिसर मानसिंह के अनुसार फायर सीजन से पहले वन विभाग अपनी फायर लाइन निर्घारित कर लेता है और पुरानी फायर लाइन की सफाई की जाती है। क्रो स्टेशन का रखरखाव करके मास्टर क्रू स्टेशन को भी तैयार कर दिया जाता है। पुराने उपकरण की मरम्मत की जाती है और आग बुझाने के लिए आवश्यकता अनुसार नए उपकरण भी खरीदे जाते हैं। इसके अलावा स्टाफ को ट्रेनिंग दी जाती है और जन जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है। जिसमें वन पंचायतों एवं वन समितियों समितियों और स्थानीय लोगों की भागीदारी को बढ़ाया जाता है।

हर साल क्यों भड़कती है आग?

 उत्तराखंड में साल 2020 में फायर सीजन को 4 महीने के बजाय साल भर के लिए कर दिया गया था। जिसकी वजह से सर्दियों के मौसम में अधिक वन अग्नि की घटनाएं घटित हुई। कई बार जंगलों में लगी यह आग गांव तक पहुंच जाती है और सरकार को इस आग पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार से मदद लेनी पड़ती है। मान सिंह कहते हैं कि जंगलों में आग लगने की वजह सर्दियों में बारिश का कम होना है। बारिश कम होने की वजह से जंगलों में नमी कम रहती है। अब तो मार्च का महीना भी अप्रैल-मई की तरह हो गया है। ऐसे में होली के बाद जब तेज हवाएं चलना शुरू हो जाती हैं तो यह आग को तेजी से भड़का देती हैं

फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट कि कंसलटेंट एके धवन का कहना है कि ज्यादातर जंगलों में आग लगने की घटनाएं दुर्घटनाओं को रोकने में नाकामी की वजह से होती है। कई बार वन विभाग की तैयारियों में कमी रहती है। पूरे जंगलों से चीड़ की पत्तियों को हटाना मुश्किल है लेकिन रास्तों और संवेदनशील जगहों से इन पत्तियों को हटाया जाना चाहिए। दूसरी वजह यह है कि एक सीमा के बाद इस तरह की आप को नियंत्रित नहीं किया जा सकता है।

वह सलाह देते हुए कहते हैं जंगल और दूसरी जगह पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग करना चाहिए। इससे जंगल और आसपास नमी बनी रहेगी और स्थानीय वनस्पतियां खुद ही फलने फूलने लगेंगे और भूजल का स्तर भी बढ़ेगा और आग लगने की घटनाएं कम हो जाएंगी।

वही डॉक्टर अनिल प्रकाश जोशी का कहना है कि जंगल में आग लगने की प्रमुख वजह स्थानीय लोगों का जंगलों से संबंध खत्म होना है। वह कहते हैं गांव के लोगों को जंगल की ज्यादा जिम्मेदारियां देनी चाहिए। ताकि वे अधिकार के साथ जंगल में आग लगने पर बुझाने की अपने स्तर से कोशिश करें और वन विभाग का इंतजार न करते रहे। 

यह भी पढ़े: उत्तराखंड के सीमान्तर जिला पिथौरागढ़ का इतिहास | PITHORAGARH HISTORY IN HINDI

Related posts

Leave a Comment