LBSNAA क्या है? जाने इसके बारे में विस्तृत जानकारी

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LBSNAA क्या है? : LBSNAA का फुल फॉर्म Lal Bahadur Shastri National Administration Academy (लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकैडमी) है। LBSNAA जाना लाखों युवाओं का सपना होता है। 

यहां पर यूनियन पब्लिक कमिशन सर्विस के सिविल सेवा परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इन अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण अकादमी में सीनियर प्रशिक्षकों की टीम द्वारा दिया जाता है। यहाँ पर IAS, IPS, IRS और IFS को प्रशिक्षण दिया जाता है। यह उत्तराखंड से 23 किलोमीटर दूरी पर स्थित मशहूर हिल स्टेशन मसूरी में स्थित है। यहां पर सभी प्रशिक्षुओं को बहुत ही कठोर नियमों का पालन करना होता है। सभी के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल सीमित होता है। धूम्रपान तथा एल्कोहल के सेवन पर पूरी तरीके से प्रतिबंध होता है। 

इस एकेडमी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पर भारती प्रशिक्षुओं के अलावा भारत के पड़ोसी देश जैसे बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार के कुछ चयनित प्रशिक्षुओं को भी ट्रेनिंग प्रदान की जाती है। सभी को प्रशिक्षण के साथ 3 महीने का fundamental कोर्स कराया जाता है। 

प्रशिक्षुओं ट्रेनिंग के ड्रेस कोड – 

यहां पर ट्रेनिंग लेने वाले सभी प्रशिक्षुओं को एक विशेष ड्रेस कोड का पालन करना होता है। अकैडमी में सभी प्रशिक्षु फॉर्मल ड्रेस ही पहनते हैं। यहां तक कि मेस में खाना खाने के लिए भी ड्रेस कोड होता है। कोई भी अपने शो रूम के बाहर स्लीपर/सैंडल नही पहन सकता है। प्रशिक्षण के दौरान क्लास रूम में सभी को गर्मी में हॉफस्लीप शर्ट और पेंट के साथ नेकटाई और विंटर में फुलस्लीव शर्ट, पैंट और नेकटाई के साथ लेदर शूज पहनना अनिवार्य रहता है। वहीं महिलाओं को सलवार सूट, साड़ी, वेस्टर्न बिजनेस सूट, चूड़ीदार कुर्ता के साथ औपचारिक सैंडल या शूज पहनना अनिवार्य है।

सौवेनियर शॉप –

यहां पर प्रशिक्षुओं की सुविधा के लिए सौवेनियर शॉप है, जहां पर  प्रशिक्षण के दौरान उपयोग होने वाली सभी स्टेशनरी वस्तुएं मिलती हैं। यहाँ पर मिलने वाले हर सामान पर एकेडमी का प्रसिद्ध लोगों प्रिंट रहता है।

Training Program – 

 प्रशिक्षु को ट्रेनिंग में फाउंडेशन कोर्स (foundation course) के लिए बुलाया जाता है। यह ट्रेनिंग दो चरणों में पूरी होती है पहले चरण में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आईएएस प्रशिक्षुओं को विभिन्न विषयों में ट्रेनिंग दी जाती है ताकि वे एक अधिकारी के रूप में अपनी नौकरी में आने वाली तमाम तरह की चुनौतियों का सामना करने के योग्य बन जाये। इसमें दो तरह के मॉड्यूल होते हैं –  शीतकालीन अध्ययन, एकेडमिक मॉड्यूल।

शीतकालीन अध्ययन के अंतर्गत प्रशिक्षु अधिकारियों को भारतीय सांस्कृतिक विविधता का अनुभव के लिए पूरे देश की यात्रा कराई जाती है, जिसे भारत दर्शन के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें इसी के साथ संसदीय अध्ययन ब्यूरो के साथ एक सप्ताह की ट्रेनिंग प्रदान की जाती है, जिसमें वे संसदीय प्रणाली के कामकाज के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। इस दौरान सभी अधिकारियों को भारत के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों से मिलवाया भी जाता है।

एकेडमिक मॉडल में थीम पर आधारित प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें अनेक प्रकार के विषय शामिल होते हैं जैसे कानून और व्यवस्था, अफसर नीति निर्माण, ग्रामीण विकास व विकेंद्रीकरण, पंचायती राज, राष्ट्रीय सुरक्षा, कृषि भूमि प्रबंधन एवं प्रशासन, कार्यालय प्रबंधन, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप आदि। इसके बाद सभी प्रशिक्षुओं को एक साल के लिए जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाता है जिसके अंतर्गत वो एक डिस्ट्रिक्ट के प्रशासनिक सेटअप के बारे में समझते और सीखते हैं।

दूसरे चरण में सभी प्रशिक्षुओं को अपने अपने अनुभव को साझा करने शासन और प्रशासन की कमी और अच्छाइयों को समझने में सक्षम बनाया जाता है। इसमें सरकारी कार्यकाल के दौरान बाहरी प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को भी विशेष सत्र में बुलाया जाता है। एक तरह से इन प्रशिक्षण के दौरान अधिकारी प्रशिक्षुओं को सरकारी सेवा के कैरियर के बारे में पहले से ही सीखने का अवसर प्राप्त होता है।

प्रशिक्षुओं की दिनचर्या – 

प्रशिक्षण के दौरान सभी प्रशिक्षुओं को सुबह 6 बजे से 60 मिनट के अभ्यास के साथ उनकी दिनचर्या शुरू होती है। फिर 9 बजे से एकेडमिक सत्र शुरू हो जाता है। एक दिन में 5 से 6 एकेडमिक सत्र होते हैं। प्रत्येक सत्र के लिए 55 मिनट का समय निर्धारित है।

शाम के समय आधिकारिक प्रशिक्षुओं को खेलने, घुड़सवारी करने, सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होने के अवसर प्राप्त होते हैं। इस दौरान प्रशिक्षण प्रशिक्षुओं को आउटडोर एक्टिविटी पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है जिसमें उन्हें पैराग्लाइडिंग, एडवेंचर, शार्ट ट्रैक, रॉक क्लाइंबिंग के अलावा हिमालय पर ट्रैकिंग करने का भी मौका दिया जाता है। जिससे वे विपरीत परिस्थितियों में रहना सीख सकें।

 इसके अलावा ग्रामीण जीवन को बेहतर ढंग से अति पिछड़े गांवों का दौरा भी कराया जाता है। क्लब और सोसाइटी की गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए भी उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है। 

यह प्रशिक्षण पूरा होने में लगभग 2 वर्ष का समय लग जाता है। ट्रेनिंग समाप्त होने के बाद सभी प्रशिक्षुओं को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मान्यता प्राप्त MA की डिग्री दी जाती है। यह डिग्री पब्लिक मैनेजमेंट में होती है। यह विशेष डिग्री सिर्फ UPSC सिविल सर्विस परीक्षा को पास करने वाले आईएएस ऑफिसर को ही दी जाती है।

LBSNAA का इतिहास (History of LBSNAA) –

15 अप्रैल 1958 को भारत के तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने लोकसभा में घोषणा की थी कि सरकार एक ऐसे राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी की स्थापना करेगी जहां पर सिविल सेवा में जाने वाले सभी सदस्यों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। गृह मंत्रालय द्वारा मसूरी के शार्लेविल एस्टेट में राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी की स्थापना हुई। 1972 में ही इस एकेडमी का नाम बदलकर लाल बहादुर शास्त्री प्रशासन अकादमी (LBSAA) रख दिया गया। इसमें ” राष्ट्रीय” शब्द 1973 में जोड़ा गया। अब यह एकेडमी लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA) के नाम से जानी जाती है।समय-समय पर इसके भवनों का विस्तार किया गया और नए भवनों का निर्माण हुआ,  साथ ही कई स्थानों का अधिग्रहण किया गया।

अकादमी के मिशन – इस एकेडमी का मिशन है “प्रशिक्षकों को आधारभूत मूल्य जैसे सत्य, निष्ठा, सम्मान, व्यवस्था, एकता, सहयोग, वंचितों की सेवा करना सीखना”।

इसके लिए सरदार वल्लभभाई का एक संदेश “यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी पूरी क्षमता से अपने देश के लोगों की सेवा करें, निष्पक्ष रहे, विनम्र बने और दृढ़ प्रतिज्ञा रहे, जो काम आपके पास है, उसके लिए अच्छी तरह से तैयार रहें और उसे सफलतापूर्वक पूर्ण करें” को खुद पर लागू करना।

इस एकेडमी का लक्ष्य गुणात्मक प्रशिक्षण देकर सहयोग पूर्ण नैतिक और पारदर्शी परिवेश में कार्यकुशल और उत्तरदायी सिविल सेवकों के जरिए सुशासन स्थापित करने में सहायता प्रदान करना है।

अकादमी की भौगोलिक स्थिति – 

यह अकादमी उत्तराखंड के मसूरी में स्थित है, जो कि एक हिल स्टेशन है। यह समुद्र तल से 6580 फुट ऊंचाई पर है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी 35 किलोमीटर है। यह उत्तरी दिल्ली से करीब 270 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आज इसका क्षेत्रफल 189 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें 6 मुख्य भवन है, जहां पर बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जाती है। इसमे 6 प्रमुख भवन – 

चार्लेविले कैंपस, इंदिरा भवन हैप्पी वैली में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स, पोलो ग्राउंड, शार्लेविल बिल्डिंग कर्मशीला बिल्डिंग  है।

LBSNAA अकादमी का गीत (song) – 

LBSNAA एकडेमी Song बंगला, हिंदी, तमिल और मराठी भाषाओं का मिक्सअप है। LBSNAA song के lyrics इस प्रकार से हैं – 

“हओधरमेते धीर, हओ करमेते बीर,। बंगला ।

हओ उन्नेतोशिर – नाहि भॉय ।

भुलिभेदाभेद ज्ञान, हओ सबे आगुआन

साथे आछे भगबान – हबे जॉय।

रहोधर्म में धीर, रहो कर्म में वीर । हिंदी ।

रखो उन्नमत शिर – डरो ना ।

नानाभाषा, नाना मत, नाना परिधान,। बंगला।

बिबिधेरमाझे देखो मिलन महान ।

देखियाभारते महाजातिर उत्था न

जागो जान मानिबे बिश्शउय

जागोमान मानिबे बिश्शशय ।

उल्लमत्तिल उरूदियाय सेयलिल विरमुडन। तमिल ।

तलैनिमिर्न्दुत निर्पाय नी।

रहोधर्म में धीर, रहो कर्म में वीर । हिंदी ।

रखो उन्नमत शिर – डरो ना ।

भूलि भेदा भेद ज्ञान, हओ सबे आगुआन, । बंगला ।

साथेआछे भगबान – हबे जॉय।

व्हाआ धर्मात धीर, व्हा करणीत वीर। । मराठी ।

व्हाआउन्नमत शिर – नाही भय

नानाभाषा, नाना मत, नाना परिधान, । बंगला।

बिबिधेरमाझे देखो मिलन महान ।

देखियाभारते महाजातिर उत्था न

जागो जान मानिबे बिश्शउय

जागोमान मानिबे बिश्श य ।

हओ धरमेते धीर, हओ करमेते बीर

हओ उन्नततोशिर – नाहि भॉय ।

हओ उन्नततोशिर – नाहि भॉय

हओ उन्नततो शिर – नाहि भॉय ।।”

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