मकर सक्रांति के पर्व पर रहेगा 4 घंटे का पुण्यकाल ,भरी मात्र मे करेगे दान

भगवान सूर्यदेव के उत्तरायण होने का पर्व मकर संक्रांति इस बार पौष शुक्ल पंचग्रही योग में बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार संक्रांति पर करीब साढ़े चार घंटे पुण्यकाल रहेगा। इस दौरान दान करना शुभ होता है। ज्योतिषाचार्य पंडित विष्णु प्रसाद भट्ट ने बताया कि संक्रांति पर पुण्यकाल सुबह 8:03 बजे से दोपहर साढ़े 12 बजे तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करने से व्यक्ति का पुण्य प्रभाव हजार गुना बढ़ जाता है।

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ज्योतिषाचार्य आचार्य डॉ. सुशांत राज ने बताया कि दान में गुड़, काले तिल, खिचड़ी, कंबल और लकड़ी का विशेष दान होता है। पूरब की तरफ हाथ में जल, अक्षत लेकर दान का संकल्प लेकर फिर दान करें। वहीं, प्राचीन टपकेश्वर महादेव मंदिर के महंत कृष्णा गिरी महाराज ने कहा कि कोरोना काल में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालु अपने घर में पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही मांगलिक कार्य आरंभ हो जाएंगे। हालांकि, गुरु और शुक्र के अस्त होने के चलते इस बार शादी के शुभ मुहूर्तों के लिए लंबा इंतजार करना होगा। सूर्य को प्रसन्न करने के लिए सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के साथ आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।
संक्रांति पर ही सूर्य की दिशा बदलती है और इसका धार्मिक के साथ ही भौगोलिक महत्व भी है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है।

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