देवभूमि न्यूज़देहरादून

शिव के आंगन मे लगी भक्तो की लम्बी लम्बी लाइन : आज है सावन का पहला सोमवार

सावन का पहला सोमवार है। इस कारण आज तड़के से ही मंदिरों और शिवालयों के बाहर भक्तों की लंबी लाइन लग गई। बारिश भी भक्तों की आस्था को डिगा नहीं सकी। सावन भगवान शिव का सबसे प्रिय माह होता है। इस बार 19 जुलाई को सावन का पहला सोमवार होने से मंदिरों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की लंबी लाइन लग गई। वहीं कोरोना संक्रमण को देखते हुए शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करने के लिए कहा गया है। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और हल्द्वानी के साथ ही राज्य के सभी शिवालयों में पूजा अर्चना का दौर जारी है।

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टिहरी जिले के देवलसारी महादेव, कोटेश्वर, ओणेश्वर, सत्येश्वर, बूढ़ाकेदार, कुंजेश्वर महादेव मंदिर में भी भक्त पूजा के लिए पहुंचे हैं। पंडित कामेश्वर प्रसाद उनियाल का कहना है कि भगवान शिव का जल धारा, बिल्व पत्र और दूध-दही से अभिषेक करना चाहिए।

सावन माह में की गई शिव उपासना बहुत ही फलदायी होती है और इसका फल बहुत जल्दी मिलता है। देवलसारी मंदिर के पुजारी गगन भट्ट ने जलाभिषेक करने आने वाले श्रद्धालुओं से मास्क पहनकर आने की अपील की है। हालांकि मैदानी क्षेत्रों में सावन का पहला सोमवार 25 जुलाई को है। इस बार सावन में चार सोमवार आएंगे। छह अगस्त को प्रदोष व्रत रहेगा। वहीं 13 अगस्त नाग पंचमी आएगी। धार्मिक मान्यता है कि सावन के पावन महीने में भगवान शिव की पूजन-अर्चना से भोले बाबा की कृपा बरसती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन भगवान शंकर का महीना माना जाता है। शिव का अर्थ कल्याण है। कहा जाता है कि कण-कण में भगवान शिव का वास है। सावन का महीना 16 जुलाई शुक्रवार से शुरू हो गया है। सावन में सोमवार को भगवान शिव की पूजा फलदायी मानी जाती है। इस बार सावन में कुल चार सोमवार आएंगे।

छह अगस्त को प्रदोष व्रत पड़ रहा है। 13 अगस्त को आ रही नाग पंचमी का फल भी शुभदायक है। विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष पं. उदय शंकर भट्ट ने बताया कि सावन में भगवान शिव का अभिषेक करना अत्यंत फलकारी होता है। शुक्रवार काे शिव मंदिरों में बेहर सिमित संख्या में भक्त पूजन-अभिषेक के लिए पहुंचे।

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