उत्तराखंड में विधानसभा के 23 सितंबर से शुरू होने वाले मानसून पर भी करोना का प्रभाव पड़ रहा है,जाने कैसे?

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उत्तराखंड में विधानसभा के 23 सितंबर से शुरू होने वाले मानसून पर भी करोना का प्रभाव पड़ रहा है,जाने कैसे?

हम सभी लोग देख रहे हैं कि अभी कोरोना वायरस बहुत तेजी से हर जगह फैला है ऐसे में उत्तराखंड में कोरोना संकट का साया विधानसभा के 23 सितंबर से शुरू होने वाले मानसून सत्र पर भी पड़ रहा है। इस बार सभी लोग कोरोना वायरस के कारण एक दूसरे से शारीरिक दूरी बनाने और अनुपालन सुनिश्चित कराने के मद्देनजर विधानसभा कई बातों पर चर्चा करने में जुटे हुए हैं। प्रेमचंद अग्रवाल ने विधानसभा मंडप के निरीक्षण के बाद कहा कि सत्र के दौरान 65 साल से अधिक आयु के विधायकों की सदन में ऑनलाइन भागीदारी कराने के विकल्प पर भी विचार हम लोग कर रहे हैं।

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सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि सरकार ने इस बार विधानसभा का तीन दिवसीय मानसून सत्र 23 सितंबर से देहरादून में आयोजित करने का फैसला किया है। जैसा कि हम सभी देख रहे हैं इस बार कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस सत्र के दौरान सुरक्षित शारीरिक दूरी के मानकों के अनुपालन की चुनौती भी है । इस बार जो भी लोग हैं वह एक दूसरे से शारीरिक और दूरियां बनाकर रखेंगे। सदस्यो के लिए इस बार विधानसभा के सभामंडप में बैठने की जगह सीमित कर दिया गया है।

उसके बाद विस अध्यक्ष अग्रवाल ने शुक्रवार को विधानसभा मंडप के जांच के दौरान सुरक्षित शारीरिक दूरी के व्यवस्था को ध्यान में रखते विधायकों के बैठने की व्यवस्था का जायजा लिया। विस अध्यक्ष अग्रवाल ने सभी लोगों को दो गज की दूरी का फासला रखने के साथ ही और बातों पर उन सभी अधिकारियों से विचार विमर्श लिया और अपना विचार विमर्श दिया भी है। इसके बाद में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के चलते इस बार सत्र चलाना चुनौती से कम नहीं है। इसे स्वीकार करते हुए सुरक्षा के सभी इंतजाम पुख्ता कर सत्र चलाया जाएगा।

उन्होंने बताया है कि अगर 65 साल से अधिक आयु के विधायकों की ऑनलाइन भागीदारी की व्यवस्था किया जाता है तो इस दायरे में विपक्ष और पक्ष के करीब 10 विधायक ही आएंगे। अभी सब ने यही विचार किया है। ये विचार भी चल रहा है कि अन्य विधायक भी ऑनलाइन भागीदारी कर सकते है। उन्होंने कहा कि विकट परिस्थिति में सदन सुचारू रूप से चले, इसमें सभी का सहयोग जरूरी है।

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